मुझे आरज़ू है तेरी, मेरे ज़ख्म हज़ारों है ।
मेरी जान तेरे सर पे, मेरे कत्ल हज़ारों है ॥
मेरी तिश्नगी से छलके, पैमाने हज़ारों है ।
तेरे दर से होके निकले, मयखाने हज़ारों है ॥
तेरी संगदिली को कहते, अफ़साने हज़ारों है ।
तेरी महफ़िलों से रुक्सत, दीवाने हज़ारों है ॥
तेरी आतिशों मे लिपटे, परवाने हज़ारों है ।
मेरे उम्र से मयस्सर, वीराने हज़ारों है ॥
मेरी जान तेरे सर पे, मेरे कत्ल हज़ारों है ॥
मेरी तिश्नगी से छलके, पैमाने हज़ारों है ।
तेरे दर से होके निकले, मयखाने हज़ारों है ॥
तेरी संगदिली को कहते, अफ़साने हज़ारों है ।
तेरी महफ़िलों से रुक्सत, दीवाने हज़ारों है ॥
तेरी आतिशों मे लिपटे, परवाने हज़ारों है ।
मेरे उम्र से मयस्सर, वीराने हज़ारों है ॥
really nice!!!! Please continue ....good start..
ReplyDeleteinmen shabdon ka matlab to samjha :)
DeleteSure mam
Deletetishnagi = pyas, sangdili = berukhi, aatish = aag, n mayassar = milte hue :)
aur kuch ho to humse mukhatib ho skte hain aap :) i mean puch lena mujhse...