Thursday, October 31, 2013

Aashiqi

इश्क़ की दो गज़ ज़मी में, दफ्न होती ज़िंदगी
आपकी मैक़श नज़र में, डूबती दुनिया मेरी

अब लबों से जो भी निकले, बन गयी वो मौसिकी
मय को भी मदहोश करदे, आपकी ये आशिक़ी

Wednesday, October 30, 2013

Sikhla Do....

जीना तो मुझे आता ही नहीं, मरने के तरीके बतला दो
ख़ुश रहना कभी सीखा ही नहीं, आँसू पीना ही सिखला दो

माहौले ज़श्न तो हुए नहीं, मातम पुरसी ही सिखला दो
रंगीन फ़िज़ा कभी हुई नहीं, पतझड़ सहना ही सिखला दो

चुप रहकर तो  बरसों गुज़रे, मुझे ख़ुद को कहना सिखला दो
घुट घुट करके साँसे थकती, इन्हें अब तो थमना सिखला दो

कोई साथ चले तक़दीर नहीं, मुझे बेज़ा भटकन सिखला दो
मेरे ख्वाब में भी उम्मीद नहीं, मुझे ज़िंदा मरना सिखला दो

ज़न्नत मेरी किस्मत है ही नहीं, दोज़ख की तरफ़ ही भिजवा दो
मरके भी सुकून क्या मिले मुझे, मुझे अब सहना ही सिखला दो

Saturday, October 19, 2013

Nazariya

ज़िन्दगी क्या है, मौत के इंतज़ार के सिवा ।
मौत भी क्या है, एक हँसी ख़्वाब के सिवा ॥

ये अश्क क्या है, ज़ख्मों से रिसते हुए पानी के सिवा ।
ये दर्द क्या है, ज़स्बातों की चलती हुई आँधी के सिवा ॥

ये इश्क़ क्या है, पल पल बदलते एहसास के सिवा ।
मुश्क़ भी कुछ नहीं, सीने मे उठते सैलाब के सिवा ॥

ये रिश्ते क्या है, मतलबपरस्ती के तरीकों के सिवा ।
ये अपने क्या है, ख़ून चूसते कारिन्दों के सिवा ॥

ये दुनिया क्या है, ग़मों से भरे एक साज़ के सिवा ।
मैं खुद भी क्या हूँ, आँसुओं में एक लिपटी लाश के सिवा ॥


Friday, October 18, 2013

Kashmaksh

तेरी नज़दीकी कभी हुई नहीं, फ़िर कमी ये क्यों अब खलती है ।
तेरे साथ मै दो गज़ चली नहीं, फ़िर राह तन्हा क्यों लगती है ॥


Shikwa

मुझे आरज़ू है तेरी, मेरे ज़ख्म हज़ारों है ।
मेरी जान तेरे सर पे, मेरे कत्ल हज़ारों है ॥

मेरी तिश्नगी से छलके, पैमाने हज़ारों है ।
तेरे दर से होके निकले, मयखाने हज़ारों है ॥

तेरी संगदिली को कहते, अफ़साने हज़ारों है ।
तेरी महफ़िलों से रुक्सत, दीवाने हज़ारों है ॥

तेरी आतिशों मे लिपटे, परवाने हज़ारों है ।
मेरे उम्र से मयस्सर, वीराने हज़ारों है ॥


Thursday, October 17, 2013

Iltaja

मेरी आँख के ये आँसू, तेरी आँखों से बहेंगे ,
जो मेरा हाथ थामा, तो ग़म तूझे थामेंगे ;

मेरे दर्द की कहानी, तेरे होंठ अब कहेंगे ,
जो मुझसे दिल लगाया, तो ज़ख्म भी लगेंगे ;

मेरी बद्नसिबियाँ भी, कुछ तो तुझे लगेंगी ,
जो तूने मुझे चाहा, तो वो तुझे चाहेंगी ;

मेरी ज़िन्दगी के पतझड़ भी, तुझको सहने होंगे ,
जो ज़िन्दगी तो बाँटा, तो अश्क भी बटेंगे ;

मेरी बेबसी के चर्चे, तेरे कान भी सुनेंगे ,
मेरे साथ मेरे हमदम, क्या घुट  के जी सकेंगे;

मुझे छोड़ दे मेरे मालिक, तेरा मुफ़ीद होगा ,
तेरी आँख न रोएगी, और दिल भी ख़ुश रहेगा ॥


Aagaz

So by now i have started blogging my write ups.... a new journey begins here....

मयखाने का दस्तूर सा है, हर शख्स यहाँ मजबूर सा है ;
हर शाम यहाँ कोई महफ़िल है, हर सुबह किसी का मातम है.….