इश्क़ की दो गज़ ज़मी में, दफ्न होती ज़िंदगी
आपकी मैक़श नज़र में, डूबती दुनिया मेरी
अब लबों से जो भी निकले, बन गयी वो मौसिकी
मय को भी मदहोश करदे, आपकी ये आशिक़ी
आपकी मैक़श नज़र में, डूबती दुनिया मेरी
अब लबों से जो भी निकले, बन गयी वो मौसिकी
मय को भी मदहोश करदे, आपकी ये आशिक़ी