So by now i have started blogging my write ups.... a new journey begins here....
मयखाने का दस्तूर सा है, हर शख्स यहाँ मजबूर सा है ;
हर शाम यहाँ कोई महफ़िल है, हर सुबह किसी का मातम है.….
मयखाने का दस्तूर सा है, हर शख्स यहाँ मजबूर सा है ;
हर शाम यहाँ कोई महफ़िल है, हर सुबह किसी का मातम है.….
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ReplyDeleteWow.....really nice..Good Start ..carry on!!!!
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