Saturday, October 19, 2013

Nazariya

ज़िन्दगी क्या है, मौत के इंतज़ार के सिवा ।
मौत भी क्या है, एक हँसी ख़्वाब के सिवा ॥

ये अश्क क्या है, ज़ख्मों से रिसते हुए पानी के सिवा ।
ये दर्द क्या है, ज़स्बातों की चलती हुई आँधी के सिवा ॥

ये इश्क़ क्या है, पल पल बदलते एहसास के सिवा ।
मुश्क़ भी कुछ नहीं, सीने मे उठते सैलाब के सिवा ॥

ये रिश्ते क्या है, मतलबपरस्ती के तरीकों के सिवा ।
ये अपने क्या है, ख़ून चूसते कारिन्दों के सिवा ॥

ये दुनिया क्या है, ग़मों से भरे एक साज़ के सिवा ।
मैं खुद भी क्या हूँ, आँसुओं में एक लिपटी लाश के सिवा ॥


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