Thursday, October 17, 2013

Iltaja

मेरी आँख के ये आँसू, तेरी आँखों से बहेंगे ,
जो मेरा हाथ थामा, तो ग़म तूझे थामेंगे ;

मेरे दर्द की कहानी, तेरे होंठ अब कहेंगे ,
जो मुझसे दिल लगाया, तो ज़ख्म भी लगेंगे ;

मेरी बद्नसिबियाँ भी, कुछ तो तुझे लगेंगी ,
जो तूने मुझे चाहा, तो वो तुझे चाहेंगी ;

मेरी ज़िन्दगी के पतझड़ भी, तुझको सहने होंगे ,
जो ज़िन्दगी तो बाँटा, तो अश्क भी बटेंगे ;

मेरी बेबसी के चर्चे, तेरे कान भी सुनेंगे ,
मेरे साथ मेरे हमदम, क्या घुट  के जी सकेंगे;

मुझे छोड़ दे मेरे मालिक, तेरा मुफ़ीद होगा ,
तेरी आँख न रोएगी, और दिल भी ख़ुश रहेगा ॥


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